मेरा उससे थोड़ा जघड़ा होता है,,,!
और कभी रूठना मनाना भी होता है,,,!
मेरे जहन में पूरे जहा का खून खोलता है, जब,,,!
ये बर्दास्त ए मोहोब्बत में दिल को आग लगती है,,!
और ना जाने क्यों आंखो में से आंसू पिगलते हुए निकलते है,,,!
है गलत ये खुदा रूह से चोट खाई और जिस्म को राख करते है,,,!
DEAR ZINDAGI 🌹