Hindi Quote in Story by Kriti Sharma

Story quotes are very popular on BitesApp with millions of authors writing small inspirational quotes in Hindi daily and inspiring the readers, you can start writing today and fulfill your life of becoming the quotes writer or poem writer.

#मन्दिर

रमन मन्दिर जाने को घर से निकला और सोचने लगा जब में हाथ डाला और देखा पचास का नोट। अरे! यह क्या? अब वापिस जाऊँ और छुट्टा करवा के लाऊँ या आज यह ही दान पात्र में दे दूँ।

लेकिन क्या ये मन्दिर के पुजारी सब ठग नहीं होते? कल
ही तो कमल ने बताया कि पण्डित जी ने उसको पूजा के लिए ५०० रुपये का खर्चा बता दिया। लूट मचा रखी है सबने।

ख़ैर रमन को याद आया कि उसने खुद से वादा किया था कि वो पद्दोन्नती के बाद मन्दिर अवश्य जायेगा। मन्दिर तो ज़्यादा बड़ा नहीं था परन्तु बहुत वर्षों से निर्मित था तो कुछ ही लोग आते थे।

मन्दिर पहुँच कर रमन ने भगवान जी के समक्ष हाथ जोड़े और पण्डितजी की तरफ़ देखते हुये पचास का नोट निकाला और दान-पात्र में डाल दिया। मन ही मन में रमन ख़ुश था और पण्डित जी ने भी रमन की मनोस्थिति को भांपा और एक मुस्कान दे दी।

रमन ने पण्डित जी के पाँव छुए और बस निकलने ही वाला था कि पण्डित जी ने आवा लगाई, “बेटा”। रमन को लगा कि कहीं ये बूढ़ा पण्डित कुछ और रुपये ना माँग ले तो चुपके से अनसुना कर के निकलने लगा।

पण्डित जी ने कैसे भी कदम तेज किए और रमन के कंधे पर हाथ रखा। इस से पहले पण्डित जी कुछ बोलते, रमन ने पहले ही बोल दिया, “कल शिवरात्रि है ना। माँ ने व्रत रखना है। उनके लिए फल लाने हैं, दूध भी। अब लोग कितना दूध बर्बाद करते हैं। ग़रीबों को क्यू नहीं देते। आप पुजारी लोग भी कितना फल खा लोगे? ग़रीबों को दे दिया करो।”

पण्डित जी चुपचाप सुनते रहे और बोले, “बेटा, ५०० रुपये की सिनेमा की टिकट बर्बादी नहीं है, १० रुपये का दूध है। जो दूध भला मानुष चढ़ाता है वह हम जानवरों को पिलाते हैं। कितना फल दे जाते हो बेटा? ४ केले? २ सेब? तुम्हें क्या लगता है कि ये पूरी ज़िंदगी खाते हैं हम? तुम्हें कैसे पता कि हम धनी हैं? क्या कभी-कभार तुम्हारे ५० रुपये का चढ़ावा चढ़ाया जाए तो पुजारी अमीर बन जाता है? मेरी बीवी-बच्चे सब मिल कर मंदिर की देख-रेख करते हैं- गर्मी हो या सर्दी। पर किसी को क्या? बेटा मैं रिक्शा चला कर यहाँ से ज़्यादा ‘कमा’ सकता हूँ। बात केवल इतनी है कि मैं कमाने के लिए नहीं कर रहा। बेटा मंदिर में आते हो तो पुजारी की क़ीमत मत लगाया करो।”

रमन शर्मिंदा था। पता नहीं कब उसकी आँखों में आँसू भी आ गये। उसने पण्डित जी के चरण स्पर्श किए और जैसे ही जाने लगा पण्डित जी ने उसके हाथ में चालीस रुपये थमा दिये। पुजारी जी पचास रुपये का चढ़ावा देने वाली रमन की मनोदशा समझ गए थे, और रमन खुद के अज्ञान का।

#मंदिर

Hindi Story by Kriti Sharma : 111566756
New bites

The best sellers write on Matrubharti, do you?

Start Writing Now