आज है उलझन सबके मन में
क्यों लोग परेशान होते हैं
साधन सुविधा सब होकर भी
नहीं नींद चैन की सोते हैं
इसका हल खोजते यहां
यहां भ्रम के शिवा कुछ है भी नहीं
झूंठा ज़मीर मन से निर्बल
सच्चाई से वाक़िफ भी नहीं
झूंठे लंपट हैवानों के
वश में हैं शिक्षित मूढ़ सभी
चिंता ये सताती है अब तो
ये मकड़जाल से निकलेंगे कभी
हल खोजते हम कुछ प्रश्नों के
अलादीन के रिश्तेदारों से
जबकी उत्तर मौजूद यहां
घर के मंदिर गुरुद्वारों में
सौभाग्य है उस घर का जिसमें
बसी माता - पिता की सूरत है
समझो है स्वर्ग उसी घर में
जहां जननी - जनक की मूरत है
सेवा - सत्कार और मान करें
जागृत भगवान की मूरत को
जीवन हो सफल बिना संशय के
खुश देख मां - बाप की सूरत को
हम व्यर्थ परेशां होते हैं
दिल में तो कभी इतना सोचें
घर का मन्दिर क्यों भूलें हम
क्यों विचलित हो बालों को नोचें
यह सत्य स्वीकार करें मन में
मन की शांति नहीं बाहर है
दिल साफ और मन निर्मल हो
बसता वहीं स्वर्ग जहां घर है
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#मंदिर