मेरे भगवान मेरे घर आओ कभी,
मै मन्दिर सा उसको सजाती हर घड़ी,
थाल में चंदन कुमकुम भारी,
तेरे माथे पर लगाने बेकरार है।
तू करता निवास जल में और थल में भी
मेरे घर आने में एसे देरी क्यों की।
तू तो जनता सबके दोष है,
ये संसार तेरे लिए निर्दोष है
मेरे भगवान जो तुम करो थोड़ी कृपा मुझ पर भी
मेरे जीवन के मन्दिर में निवासी बन जाओ जो अभी।
#मंदिर