#मंदिर
मंदिर मस्जिद गिरजाघर ने बांट लिया भगवान को।
धरती बांटी सागर बांटा मत बांटो इन्सान को।
अभी राह तो शुरू हुई है मंज़िल बैठी दूर है।
उजियारा महलों में बंदी हर दिपक मजबूर है।
साथ उठे तो पहरा हो सूरज का हर द्वार पर।
हर उदास आंगन का हक हो खिलती हुई बहार पर।
रौंद न पाएगा फिर कोई मौसम की मुस्कान को।
धरती बांटी सागर बांटा मत बांटो इन्सान ।
"विनय महाजन"