कुछ लोग परिस्थितियों से हार कर मूहँ इस तरहा छुपाकर बैठ जाते हैं जैसे सारी परेशानियां इन्हीं के जीवन में लिख दी हैं
जरा उन्हें भी जानो जो परिस्थितियों से इस तरहा लड़ते हैं जैसे उन्हें इस बात से कोई फर्क ही नहीं पढता
जो लोग अपने शरीर के किसी अंग के न होने पर भी या शरीर कमजोर होने पर भी हौसला बनाकर भी जीते हैं,
लेकिन जिन्हें आगे बढना नहीं जिन्हें परिस्थितियों को बदलने का हौसला नहीं वो अच्छे वक्त का इंतजार करने से पहले अपनी जिंदगी का अंतिम फैसला लेलेते हैं।
-Lalit Raj