जिंदगी
मुझे तुझ से कोई शिकायत
नहीं ए जिंदगी
तू जैसी भी है मुझको
बहुत अजीज है।
तू ही मेरी मोहब्बत है
तू ही मेरी महबूब है।
तू ही मेरा हसीन ख्वाब है
तेरा हर लहजा लाजवाब है।
कभी तू तपती रेत जैसी है
कभी तू ठण्डी छाँव जैसी है।
व्यस्त सी सड़कों जैसी है
पराये शहर जैसी है।
मिट्टी की खुशबू वाले
कभी तू गांव जैसी है।
बहुत ही शुक्रिया तेरा
दिया सब कुछ मुझे तूने
मेरे लिए तो तू
खुदा की याद जैसी है।।
स्वरचित व् मौलिक
जमीला खातून