परिन्दें
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बेसक आसमानों मे उड़ाने भरने से खु़शी मिलती हैl
पर सुकूं तो परिंदों को पेड़ों पर ही आकर मिलता है ll
चाह नही है ऊँची उड़ानों पर कोई खिताब मिले l
तलाश रहती है पेट भरने के लिये बस दानें मिले ll
न किसी से दोस्ती न किसी से कोई बेर है l
मस्त मोला परिंदों का हर जगह ही शोर है ll
- RJ krish