: " मिज़ाज़ अपना
कुछ ऐसा बना लिया हमने ,,,!
किसी ने कुछ भी कहा ,
बस मुस्करा दिया हमने,,,!!
" *रिश्ते" तोड़ने तो नहीं चाहिए*
*लेकिन*
*जहाँ "कदर" न हो वहां निभाने भी नहीं चाहिए*
*अक्सर इन्सान को वहाँ आकर ठोकर लगती है,*
जहाँ उसे मंजिल मिलने का सबसे ज्यादा यकीन होता है