#खेद
नहीं खेद करते हम सब यदि
प्रकृति को सम्मानित करते
झंझावात न चलते इतने
न उसको अपमानित करते
विश्व बंद रहता मुट्ठी में
हृदयों में केवल बस प्यार
उसकी ही हम सब संतानें
कैसी जीत औ कैसी हार
छोटा सा तो जीवन सबका
स्नेह भरा होता मन में
खेद नहीं होता यदि सब ही
मिलकर रहते प्रांगण में🌹❤🌹
डाॅ.प्रणव भारती