उसको अहमियत ही नही छोटे बड़े की,,,,!
और ज़बान को लगाम देने से हट रहा है,,,!
इश्क़ की बाज़ी में ख़ुदके जिस्म को जलाता है,,,!
उसके लिए बने अरमान को दिल मे दफ़नाता हौ,,,!
क्या कहूँ शायराना अंदाज में उनसे, जो,,,!
हर एक दिल को अपने क़लम से डराता है,,,!
DEAR ZINDAGI ❣️