गुरू दुनिया का सबसे अनमोल रत्न है जिसकी कीमत पूरी दुनिया, समस्त ब्रम्हण्ड अगर तुम्हारे अधिकार मे हो जाये उसे उनके चरणों मे अर्पण करने के पश्चात अपने प्राण को अर्पण के पश्चात भी पूरी नही होती | गुरू का परिचय स्वयं गुरूकृपा ही करवाती है | मेरे केवल एक गुरू है वही शिक्षक, भाई, बन्धु और परमसखा है | वही मेरे अंतःकरण निर्देश है, मै समर्थहीन हूँ उनकी महिमा का बखान करने मे बस जितना समझी हूँ इस तुच्छ बुद्धि से, वहाँ पर संसार की सारी निधि समाप्त हो जाती है | हे सतगुरुदेव मुझ कृपा करे🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏