सिर्फ एक उम्मीद है उसके आने की, एक बेकार उम्मीद। इस उम्मीद में बहुत सबर रखना सीख लिया है। अब बहुत सी बातें समझ आती है पर उन्हें समझने का कोई मतलब नहीं लगता। वैसे तो कोई अपना है नहीं लेकिन जो था अपना वो भी अब है नहीं। मैं शायद इंतजार करने में खुद को खो दिया है।
सौ बातें जो दिल में सहेज कर रखी हैं वो सारी बातें उनसे करनी है। लेकिन अब उम्मीद टूटती जा रही है। लगता नहीं अब फिर कभी वो बातें होंगी भी। जानता था सब बदल जायेगा पर ये नहीं जानता था सब बदलने से मैं भी बदल जाऊंगा। बहुत मुश्किल है मेरे लिए यूँ रातें बसर करना।
रातें कैद करती हैं फिर मुझे उन्हीं यादों में। सच कहूं तो, ना आज चैन मिल रहा है और ना कल में आराम मिलेगा। अब बस इतना ही लगता है के सुकून बस बीते हुए कल में ही था। न कल में कोई उम्मीद थी और कल में कोई इंतज़ार था।
मैं खुद भी नहीं जानता इस इन्तिज़ार के उस पार का कोई जवाब होगा? क्या कोई हाँ या होगी इस इंतज़ार के उस पार? लोग इज़हार का इंतज़ार करते हैं और मैं बस इंकार का इंतज़ार कर रहा हूं। अंदर ही अंदर खुद से हज़ार जंग लड़ कर अब मैं भी थक चुका हूँ।
इस शान्ति में जो शोर है उसको चींख चिल्ला कर सबको सुनाना चाहता हूँ। बहुत मुश्किल है यूँ न उम्मीद से उम्मीद रखना। बहुत मुश्किल है जीना । उस इंतज़ार में एक उम्र ही बीत गयी है।
अब बस मुझे देखना है इस कहानी का अंत। हमारी ज़िन्दगी में आने वाले हर इंसान का कुछ मतलब होता है। शायद उसका मेरी ज़िन्दगी में आने का मकसद भी पूरा हो गया है इसलिए अब उनके जाने का समय भी आ गया है।