अगर तू फिर आकर वो जिद से,
झगड़ मुझ से डर डर के
वो तेरे अटखेलियों को दिल में
मन करता है बसा लू आज फिर से।
मेरी सतरंगी सहेली आजा अब कहीं से।
तुझे याद है क्या वो
बचपन था जो सुहाना।
बच्चो की रेल का झुक झुक
वो सोर सराबे वाला गाना।
तुझे अभी ठुड़ती है आंखे पुरानी।
मेरी सतरंगी सहेली आजा अब कहीं से।
तू प्यार से मेरे हाथो को पकड़ना,
हम पीछे तेरे होंगे तू आगे चलती जाना।
तू आयेगी जब वापस बचपन भी आयेगा,
तेरी एक आहट से पुरा बस्ती चहल होगी
मेरी सतरंगी सहेली आजा अब कहीं से।
#झगड़ा