जो तुम चाहोगे मुझे हरदम नही करोगे कभी झगड़ा,
बेस्वाद ,बे आर्कषण हो ना जाये इसलिए दूंगी रगड़ा,
मत समझना मेरे झगड़े में मेरा प्यार हो रहा है कम,
गृह स्वामिनी मैं तेरी दाल का स्वाद बढ़ाने को देती हूं झौंक मैं तगड़ा,
तेरी हु तेरी ही रहूंगी प्यार करूँ या करू #झगड़ा
#झगड़ा