वक़्त का शहारा ले कर जिंदा रहता परिंदा,
फड़फड़ा रहा कई अरसे का प्यासा परिंदा।
लो चलो एक और कहानी सामने अाई है,
तुम्हे पा कर भी यादों ने जिंदगी चुनवाई है।
उलफत ए सफ़र में बाहों में तुझे आज पी पुकारती है,
हररोज तेरी चाहत की तनहाई में मुझे डराती है।
महोबात का जश्न तुझे कदम कदम पर मिले,
ये बे खुदा भी तुझे मीठे जख्म हर दम आंचल में मिले।
चांद की रोशनी टूटे तारों में भी हर बार गुलमिले,
चमक छुपने जाए तो ए जमीन पर भी दस्तक ना मिले।
वफाएं इश्क़ में कभी हसी ख्वाब का पल मिले,
बेवफाई में बेबसी की चाहत का हर एक मंजर मिले।
तेरी लब्जो के अल्फ़ाज़ में रुख सा मौसम बसे,
बारिश के जैसे प्यासे पानी का एक जिल मिले।
❣️ DEAR ZINDAGI ❣️