आज कल जब जब अकेलापन काटने को दौड़ता है तो matrubharti में आ जाता हूं ।
कुछ बातें आपकी पढ़ता हूं मैं, कुछ मैं अपनी लिख जाता हूं ।
शायद कोई ऐसा मिले जो हमारे लफ़्ज़ों से हमारे भावनाओं कि समझ रखे...
बस इसी सोच के साथ मै अपनी किस्मत हर रोज़ आजमाता हूं ।।
#काnha