#त्याग
अपने चहेरे से जो जाहिर है उसे छुपाऊं कैसे,
तेरी मर्जी के मुताबिक नजर आऊँ कैसे।
एक छोटा सा घर बनाने का तस्सवुर बहुत है,
जान के बिना इसे जहा से हासिल करके भी बचाऊँ कैसे।
लाख तबाहियों में से निकलते हर मंजर के सफ़र है,
इश्क़ में कदम पीछे हटाने का ताल्लुक नहीं , मूड जाऊँ कैसे।
अनकही आंखो में आँसू का नजरिया बदलते रहेते है,
हसने वाले ज़ख्म के दर्द को नजर में आऊँ कैसे।
फूलो में से रंग, और महक जुदा होने का कोई वजूद नई,
तो ये मिट्टी में जीने की ख्वाहिश के खिलाफ सबूत लाऊं कैसे।
कोई नरगिस निगाहों में गहराई को नाप लेगा,
समुंदर के जिल से मिलना ये ख़तरा आजमाऊँ कैसे।
ये जो लकीरों में बसे नसीब की बाते है,
उस राह को बीच सफ़र में त्याग करवाऊँ कैसे।
DEAR ZINDAGI 💞🌹