जब खुलती है पुरानी डायरी
और पलटे जाते हैं पन्नें
अनचाहे ही दिख जाती है
कुछ मुरझाई गुलाब की पंखुरिया,
कुछ स्मृति चिन्ह।
और ज्योंही उनसे जुड़ी यादें जेहन में उफान मारती हैं,
व्याकुल हो जाता है मन।
ठीक उसी तरह,
जैसे एक छोटा बालक चाँद को देखकर,
उसे अपने हथेलियों से पकड़ने की चेष्टा करता है
मगर, हजार कोशिशों के बाद भी नहीं पकड़ पाने पर व्याकुल हो उठता हैं।