वोह मुझे रास्ते पर छोड़ गया,,,,!
और में उसकी राह तकता रह गया,,,,!
जूठ का सिलसिला इतना बढ़ता गया,,,,!
मेरी रूह का सच वहा ही दफनाया गया,,,,!
आंधियों के फसाने में कायनात डूब सी गई,,,,!
मुझे अंधेरों में भी एक दिया जलता दिख गया,,,,!
वोह कमबख्त जान देने वालो को छोड़ गया,,,,!
और जिस्म आे जान को छूने वालो में खुदको डुबा दिया,,!
DEAR ZINDAGI ❣️