*कलम बोलती है*
जब इंसान कहते कहते हार जाता है,
तो कलम बोलती है।
जब इंसान अंदर ही अंदर टूट जाता है,
तो कलम बोलती है।
जब भी कहीं अन्याय होता है,
तो कलम बोलती है।
जब कभी कोई बदलाव लाना होता है,
तो कलम बोलती है।
जब कभी भी कुछ हासिल करना होता है,
तो कलम बोलती है।
जब कभी भी सफलता प्राप्त होता है,
तो कलम बोलती है,
जब कभी भी लोगो तक अपनी बात पहुचाना होता है,
तो कलम बोलती है।
और जब कलम बोलती है,
तो उसके सामने कुछ भी नहीं बोल पाता है,
क्योंकि एक लेखक की आवाज़ है कलम,
अन्याय पर न्याय हासिल करना है कलम,
सफलता की मूरत है कलम,
बदलाव की पहचान है कलम।
💔
पागल दिवाना
@guardin63