रमुआ दिल्ली से है आया,जींस पुरानी हा हा हा
भाषा अपनी बदल रहा है,खींचातानी हा हा हा
मन्दिर वाला पण्डित देखो,बाल रोज अब काढ़ रहा
यजमानों की कन्या शायद,हुयीं सयानी हा हा हा
सलवारों का पेपर छूटा,भंवरे सड़कों पर आये
सोहदे को छेड़े हरजाई,पुलिस कुटानी हा हा हा
डीपी देखी, माल है कातिल,पर टाइप करते दीदी
फेसबुक की अजब कहानी,दीदी-भैया हा हा हा
भौजी का श्रृंगार गजब था, भैया को बहलाने का
भैया गांजा सुड़क रहे हैं, निपट अकेले हा हा हा
राजेश ओझा