सम भाव रक्खें हम सदा , समदर्शी भी होना चाहिए
परहित की रख कर सोच , निस्वार्थ कर्म करना चाहिए
परोत्कर्ष में हम खुश रहें , दूजे का साथ देना चाहिए
परदुख में शामिल हों सभी , खुशी में साथ हंसना चाहिए
कोई नयन नम ना हो कभी , ऐसा काम करना चाहिए
फिर श्रेष्ठ कोई क्यों ना बने , इसका मान रखना चाहिए
____________
#श्रेष्ठ