वो इश्क़ ही क्या जिसे ख्वाब-ए-खयाल ना आए मिलने का,,,!
दिल-ए-कसीस में दुआ ना आए कहीं तो उस जिंदगी का साथ कैसा,,,!
दो-जिस्म-जहन पर सिद्दत जैसी मोहोब्बत पर रोना ना आए तो कैसा,,,!
वक़्त के साथ दूरियां की यादें ना पाए तो प्यार का अहसास कैसा,,,,!
मान लेते है जिस्म-ओ-जान में जिसे उतारा हो उससे दूरी हो भी जाए,,,!
पर उस दिल के हालात को भूलकर जिंदा रह सकूं ऐसा खुदा का करिश्मा कैसा,,,!
DEAR ZINDAGI 🙏