#गति
#अमंगल
चाहूं तो अभी माप लू तेरी चाल कितनी है
चाहूं तो अभी नाप लू तुझमें गुलाल जितनी है
तू ना समझ की मै ना समझ हूं
चाहूं तो अभी भाप लू तू बेहाल कितनी है
मुझे इश्क है तुझसे, तेरी गति का क्या असर
जहा देखूं बस तुझे देखूं, मेरी मति पर क्या असर
तू इक खयाल है मेरी मोहब्बत का
मै डूब ना जाऊं तुझमें, तो मोहब्बत का क्या असर
चलती रहे जमीं, चलता रहे आसमां
गति का क्या रहा, जब मिटता रहे निशां
खुद में समेट लूंगा तुझे, गम ना कर
ढूंढ़ती रहे ये सदी, ढूंढ़ता रहे ये जहां
शुभ - अशुभ, मंगल - अमंगल
भ्रम है तो ना तोड़ इस भ्रम को
पाप - पुण्य, धर्म - अधर्म
भ्रम है तो ना मोड़ इस क्रम को
ईश्वर भी नतमस्तक हो जाते हैं भक्ति में
यह भी भ्रम है, तो ना छोड़ इस परिश्रम को
धन्यवाद।।