बनावटी रिश्ते को जहन में जान बना कर भर दिया,
उसके उलझे शहर में खुदकी छबि को उलझा दिया।
वजूद मिले उसके नाम के ऐसा हर कायनात में सफ़र बना दिया,
जहा से उसके बारे में सोच सोच कर खुदको आइने में तलाश किया।
जन्नत ढूंढ़ते हुए उसको दिल के आलम में शहजदी बना दिया,
फिर ए_जिंदगी_ खुदा से खुद का पता पूछने पर ताज्जुब खड़ा किया।
अल्फ़ाज़ जो निकले मेरे हुस्न_ए_ दीवानगी के चर्चे पर,
उसके जज्बात से मेरे जिस्म को जलाकर बड़ा सानोसौकत का इनाम दिया।
नब्ज से लहू की धारा में उसकी पहचान को आज भी जिंदा रखता हूं,
और उसके अहसास का वजूद जिंदा रखने अपने दिल पर जख्म दिया।
DEAR ZINDAGI 💞