एक स्त्री के अनकहे जज़्बात....
लिख दी है एक स्त्री की अभिलाषा,
कोन समजाता है यहाँ दर्द की भाषा।
आज लड़कियों की जरूरत तो है, मग़र फिर भी
एक लड़की को जन्म लेते ही दफ़ना ने की बात करता।
ये जो कहते है दूर रहना उससे हर कदम,
उसकी ही कोख से जन्म लिया तब कहा जाता।
हर मर्यादा एक स्त्री को बांध देती है,
ख़ुद उसकी जगह होता तो समझ पाता।
चहेरे से उसको हर जगह मोहताज बनाता,
अगर हो जाए कहीं उसकी कोई भूल तो उसे बुरा मानता।
पवित्र कहके सब जगह उसे लक्ष्मी का वास्ता देता,
जब महावारी से पीड़ित हो तो उसे घर के कोने बैठा देता,
समाज के लिए स्त्री का सौंदर्य देख शादी कर लाता,
फिर कहीं उसे खुले में गुमने से पर्दे का वास्ता दे दिया जाता,
DEAR ZINDAGI 😔