*धन कहता मुझे जमा कर..*
*कैलेंडर कहता है मुझे पलट*
*समय कहता हैं मुझे प्लान कर*
*भविष्य कहता हैं मुझे जीत*
*सुंदरता कहती हैं मुझे प्यार कर.*
*लेकिन*
*भगवान साधारण शब्दों मैं कहता हैं.*
*".कर्म कर औऱ*
*मुझ पर विश्वास कर !*
*सुख दुख तो अतिथि है,*
*बारी-बारी से आएंगे चले जाएंगे,*
*यदि वह नहीं आएंगे तो हम अनुभव कहां से लाएंगे..!!*
*फिर घमंड कैसा*
*घी का एक लोटा,*
*लकड़ियों का ढेर,*
*कुछ मिनटों में राख.....*
*बस इतनी-सी है*
*आदमी की औकात !!!!*
*एक बूढ़ा बाप शाम को मर गया,*
*अपनी सारी ज़िन्दगी,*
*परिवार के नाम कर गया,*
*कहीं रोने की सुगबुगाहट,*
*तो कहीं ये फुसफुसाहट....*
*अरे जल्दी ले चलो*
*कौन रखेगा सारी रात.....*
*बस इतनी-सी है*
*आदमी की औकात!!!!*
*देश में "राजा"*
*समाज में "गुरु"*
*परिवार में "पिता"*
*और घर में "स्त्री"*
*ये कभी "साधारण" नहीं होते*
*क्योंकि*
*~ निर्माण और प्रलय ~*
*इन्हीं के "हाथ" में होता है !*
#આક્રમણ