ए जिंदगी माहज़बी जैसी एक आयने की परछाई है,
उस शक्श की एक तस्वीर को रूह में गहराई से छुपाई है।
उसके लफ्ज़ से किताब बना कर कई ग़ज़ल बसाई है,
और लफ्ज़ कहीं चुप से हो जाए तो जहन में उदासी छाई है।
वो अगर खुशी से छाव का आंचल बढ़ा दे तो दुनिया बनाई है,
और अंगारों की तरह जलन दे तो खुद में फनाह हो ने की तरकीब दिखाई है।
हर एक दायरे में उस शक्श से एक वफा का सिला सोचता हूं,
जख्म इतने है दिल में की उसकी हर करवटों में दर्द मिटा सकूँ ये ख्वाहिश जगाई है।
DEAR ZINDAGI ❣️🌹