किसी के होते थे हम जाने जाँ पहले बहुत पहले
मुक़द्दर हमपे भी था मेहरबाँ पहले बहुत पहले
मेरे हमसाये को दरकार थी कुछ रौशनी मुझसे
सो मैंने फूक डाला आशियाँ पहले बहुत पहले
ज़माने वालो वो मंज़र तुम्हें कुछ याद तो होगा
मिले थे जब ज़मीनो आसमाँ पहले बहुत पहले
बहुत पहले लगी थी आग सीने में मुहब्बत की
उठा था दिल के अंदर से धुआँ पहले बहुत पहले
तुम्हारा दिल जिसे सुनते हुए भी काँप जाता है
रक़म हम कर चुके वो दास्ताँ पहले बहुत पहले
अभी तक मंज़िले मक़सूद पर अपनी नही पहुँचा
चला था इश्क़ का जो कारवाँ पहले बहुत पहले।।