हमसफ़र ( मेरी पहली कहानी )
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" सफ़र खूबसूरत है मंज़िल से भी !"
कभी कभी सफ़रमें ही हज़ार कहानियां मिलती है और कभी कभी किसीके सफ़रकी वजह ही एक कहानी होती है
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हर कहानी के कुछ पहलू होते है
कही रास्ते ढूंढ़ना जरूरत होती हैं तो कही आवारगी में रास्ते भटकना सुकून देता है
कहीं मंज़िल को ढूंढ़ने का जूनून होता है
तो किसको पाना ही किसी की मंजिल बन जाती है
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इस कहानी के भी कई पहलू है,
हर एक मोड़ पर उन्हें ईमानदारी से तराशने की अपनी तरफ से पूरी कोशिश करूंगी...
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सुना है प्रथमपुज्य गणेश जी के आशीर्वाद के बिना कोई कार्य सफल नहीं होता, तो आज उसी विघ्नहर्ता बाप्पा के आशीर्वाद से अपने एक नए सफर , नई कहानी कि शुरुवात करती हूं :
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" ये उन दो लोगों की कहानी है
जो अपना अपना मकाम ढूंढ़ने निकले है लेकिन ये उन्हें भी खबर नहीं की तकदीर ने दोनों को एक ही रास्ते के दो सिरों से चलाना शुरू किया है.
अंजाने में दोनों भी एक ही रास्ते में एक दूसरे के करीब आ रहे है,
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अब देखना ये है कि रास्ता कितना लंबा है?
सफ़र पूरा होगा? या कोई रास्ता बदल देगा?
क्या इनका मिलना तकदीर को सच में मंजूर होगा?