#बेखबर
क्यूं नहीं चाहते तुम मुझे ऐ सनम
कोई दूजा वहां हमसफ़र तो नहीं
क्यूं नहीं अब रही एक परवाह मेरी
तुम मगरुर इतने बेखबर तो नहीं
मेरी आंखो से ओझल हुए क्या हुआ
मेरे दिल को तुम्हारा महल मिल गया
तुम जहा भी रहो प्यार के इस जहां में
इन निगाहों में तुमसा कमल खिल गया
मै नहीं बेखबर ना ही अनजान हूं
मै अधूरा नहीं ना ही बे- जान हूं
मै अपनो से मिलकर तुम्हारा बना
मै मोहब्बत में सामिल इंसान हूं
।। ज्योति प्रकाश राय।।