सनम रे...
सनम रे...
तू मेरा सनम हुआ रे...
करम रे करम रे तेरा मुझपे करम हुआ रे...
कभी इन्ही अल्फाज़ो से बयां किया करते थे वो मुझपे अपना प्यार...?!
आज देकर बेवफाई का इनाम मुझे, छोड़ गए इन आँखों में इंतज़ार...?
लॉट आओ मेरे पास तुम, बस यही उम्मीद लगाए बैठी हूँ।
सूकी गीली आंखों की पुतलियों में सपने सजाये बैठी हूँ।
कामिनी वर्मा