बैठना
रखा है किसी के इंतजार में बैठने की जगा
लेकिन न जाने आज कल किसी को समय
मिलता ही नही...
है सब अपनी अपनी मस्ती में मशगूल की
आसपास क्या हो रहा है वो पता करने की
फुरसद ही नही...
समय की रफ्तार तेज है या लोगो का काम
करने का तरीका ऐसा हो गया है कि अपनो
के साथ बैठते ही नही...
~Shree