वख्त
आज तो वख्त ही वख्त है मन मचलता है
मन ही मन मुश्कुराता है दिल अपने
आप गुनगुनाने लगता है...
पता नही सालो के बाद ऐसे वख्त ही वख्त
खुद के लिए मिला है तन अपने आप
थनगनाट करने लगा है...
जिंदगी की रफ्तार गुजारते गुजारते अचानक
आज वख्त हमारा नजदीकी दोस्त बन गया कि
जाने का नाम ही नही लेता...
~Shree