सपनों में रख आस्था
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सपनों में रख आस्था कर्म तू किए जा,
त्याग से ना डर आलस परित्याग किए जा ।
गलती कर ना घबरा,
गिरकर फिर हो जा खड़ा ।
समस्याओं को रास्तों से निकाल दे ,
चट्टान भी हो तो ठोकर से उछाल दे ।
रख हिम्मत तूफानों से टकराने की ,
जरूरत नही है किसी मुसीबत से घबराने की ।
जो पाना है बस उसकी एक पागल की तरह चाहत कर , करता रह कर्म मगर साथ में खुदा की इबाबत भी कर ।
फिर देख किस्मत क्या क्या रंग दिखलाएगी,
तुझको तेरी मंजिल मिल जाएगी , मंजिल मिल जाएगी ।
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प्रवेश कुमार “ पीके '