मन की व्यथा किसे सुनाऊँ,
दिल की कथा किसे सुनाऊँ,
कोई तो मिले जिसे सुनाऊँ..
मेरे भी कुछ अरमान थे
मेरे भी होंठों में मुस्कान थे
क़िस्मत भी मुझ पर मेहरबान थी
हर राह मेरी आसान थी
आज कहाँ मैं खो गया हूँ
कोई तो मिले राह बता दे
सूरज भी मेरा डूब गया है
चाँद भी मेरा छुप गया है
अंधियारा ही अंधियारा है
कोई तो आ के राह बता दे
आज मुझे ये क्या हो गया है
कोई तो मिले मुझे बता दे
मन की व्यथा किसे सुनाऊँ,
दिल की कथा किसे सुनाऊँ,
कोई तो मिले जिसे सुनाऊँ..