मुसलमानों का नाम आगे बढ़ाने के लिए
वो बेटा हद से गुजर गया
ना जाने उसे कौन गुमराह कर बैठा
जो वो जग से गुजर गया
खाई थी ईद की सेवईयां उसने
तो पड़ोसी का स्तायानारायान का हलवा भी खाया था
जितना खेला था वो अपने मस्जिद में
उतना ही उसने मंदिर के बाहर खेल सजाया था
फिर ना जाने कौन सी खलिश थी उसको
जो वो ये जुर्म कर बैठा
तिरंगा तो उसने भी लहराया था अपनी छत पर
फिर भी उसी तिरंगे को कष्ट दे बैठा
मां बाप को तो इल्म भी ना था
उनका सपूत क्या कर बैठा
वो तो आज भी वन्दे मातरम् ही कह रहे थे
ना जाने वो क्यों जिहाद केह बैठा