जो मात्र स्त्री के बाहरी सौंदर्य को देखता है, वह उसके देवित्व को महसूस करने में पूर्णतः असमर्थ है, वह तूफानों के मध्य जीवन प्रस्तुत करती है, स्याह अंधेरों से सूरज बन निकलती है, उसका हृदय रौशनी घर की तरह जलता है उनके लिये जो इस माया नगरी में रास्ता भूले हैं...