उस आंखों की भी जरा सी बात सुन लिया करो,
जो आपके दीदार को तरसा करती है...
उस हाथो को भी जरा सा हाथ दे दिया करो जो बिन पूछे हर बात पे आपका साथ दिया करते है...
उस चुप होठों को भी जरा पूछ लिया करो जो हर मनचाही बात आपकी बिना बोले सह लेती है...
~दिव्य त्रिवेदी