प्रकृति से बेहतर कौन चित्रकार है,
जिसने बिखेरा बहुविध रंग संसार है।
सूर्योदय, सूर्यास्त की अनुपम रक्तछटा,
चातुर्दिक फैली मखमली हरीतिमा,
अनन्त नीलाकाश,अथाह,नील सागर,
श्वेत स्याह मेघों की विभिन्न आकृतियां,
नभ की ऊंचाइयों को नापते परिंदे,
मनमोहक पुष्पों पर मंडराती तितलियां,
गगनचुम्बी शिखरों के हिमशीलाओं
पर नाचती स्वर्ण सूर्यरश्मियाँ,
कृष्णरात्रि के चुनर पर टँके सितारे,
पूर्णिमा की चन्द्रिका से आच्छादित धरा,
अलौकिक, अतुलनीय, अनिवर्चनीय
अद्भुत प्रकृति है जो करता प्राण संचार है।
प्रकृति से बेहतर कौन चित्रकार है।
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अनिवर्चनीय-जिसे व्यक्त न किया जा सके।
#बहुविध