लगा दी जाए जो हथकड़ी,
तुम्हारे होठों पर ख़ामोशी की।
हकीकत में अगर ना हो मुमकिन,
तो ख़्वाबों में तुम पुकारो मुझे।।
हाँ, माना मैं ख़ूबसूरत नहीं,
लेकिन कभी तो आँखों से दिल में उतारो मुझे।
और कभी देखो अपलक मुझको,
बिखरी ज़ुल्फ़ को हटा सँवारो मुझे।।
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