# गजल "
# रदीफ़ .करते है ।
आओ किसी का यूँ ही ,इंतजार करते है ।
चाय बना कर फिर ,कोई बात करते है ।।
उम्र पचास के पार ,हो गयी हमारी ।
जीवन का ,इस्तकबाल करते है ।।
कौन आएगा अब ,हमको देखने यहाँ ।
एक दुसरे की ,देखभाल करते है ।।
बच्चे हमारी पहुँच से ,अब दूर हो गये ।
आओ फिर से दोस्तों ,को काल करते है ।।
जिदंगी जो बीत गयी ,सो बीत गयी ।
बाकी बची में फिर से ,प्यार करते है ।।
ऊपरवाले ने जो भी दिया ,लाजवाब दिया ।
चलो शुक्रियाँ उसका ,बार बार करते है ।।
सभी का हाल यही है ,इस जमाने में ।
गजल मेरी सबके ,नाम करते है ।।