यहाँ बली के नाक में भी नकेल डाली जाती है।
अपने इशारों पर साँप को भी नचाया जाता है।
शिकार यहाँ शेर का भी किया जाता है।
मदोन्मत्त हाथी को भी अपने अंकुश में कर लेते हैं।
नवग्रहों को भी अपने कैद में कर लेते हैं।
निगलने वाले चाँद सूरज को भी निगल जाते हैं।
इंद्रासन भी यहाँ छीना जाता हो।
कुचलने वाले अपने विशाल पैरों तले
विंध्य सरीखे पर्वत को भी कुचल देते हैं।
उद्दाम समुन्दर को गटक जाते है।
पर काटनेवाले तो पर्वतों के भी पर काट देते हैं।
फिर किस मुँह से बात करूँ अपने हक मारने की मैं यहाँ.....??
_दीपेश कामडी 'अनीस'