हमने देखी है उन आँखों की महकती ख़ुशबू...
हाथ से छू के इसे रिश्तों का इल्ज़ाम ना दो.
सिर्फ एहसास है ये रूह से महसूस करो...
प्यार को प्यार ही रहने दो कोई नाम ना दो.
प्यार कोई बोल नहीं, प्यार आवाज नहीं..
एक खामोशी है सुनती है कहा करती है.
न ये बुझती है, न रुकती है, न ठहरी है कहीं..
नूर की बूँद है, सदियों से बहा करती है.
मुस्कराहट सी खिली रहती है आँखों में कहीं...
और पलकों पे उजाले से झुके रहते हैं.
होंठ कुछ कहते नहीं, काँपते होंठों पे मगर..
कितने ख़ामोश से अफ़साने रुके रहते हैं.
सिर्फ एहसास है ये रूह से महसूस करो...
प्यार को प्यार ही रहने दो कोई नाम ना दो.
गीतकार : गुलज़ार,
गायक : लता मंगेशकर,