आजादी के लिए शहीदों ने तो खून बहा के हमको अंग्रेज से आजाद किया पर,
क्या हम खुद के विचारों सेआजाद हो पाए?
आज भी हर चौराहे पर हर रोड पर मिलता एक बच्चा तिरंगा बेचता,
कितने बच्चे हैं जो भीख मांगते हैं क्या हम रोक पाए ?
खून बहा कर आजादी मिली है क्या हम उसे संभाल कर रख पाए ?
मुस्लिम - हिंदू जातियों के बीच में हम झगड़ा करते रहे क्या हम उससे उठ पाए?
क्यों होती है यह उच्च नीच की बातें,
क्या हम सिग्नल पर तिरंगा बेचते बच्चों को उच्च सिक्षा दे पाए..?
कई शहीद हो गए भारत मांँ के ख़ातिर मांँ को खुश करने में,
क्या हम खुद की मां को खुश कर पाए?
एक बहन का भाई एक मां का लाल एक औरत का सुहाग हमारी आजादी की खातिर कुर्बान हुए,
क्या हम उन सहिदो की मांँ- बेटी की रक्षा कर पाए?
बहुत आसान होता है आजादी के दिन झंडे का स्टेटस रखना और डीपी बदलना,
लेकिन जब हम खुद के विचारों से आजाद होंगे उस दिन सही मायनों में हम करेंगे इन शहीदों को सलाम,
इन शहीदो की #वसीयत से मिली है यह आजादी क्या इस #वसीयत को हम संभाल कर रख पाये..??
-Patel Nirupa-
🇮🇳🇮🇳 सलाम है हर शहीद को 🇮🇳🇮🇳
🇮🇳 जय हिंद 🇮🇳