मैं बहुत कमजोर हूँ।
मैं कभी भी किसी भी बात पर स्वयं को पूर्ण रूप से प्रस्तुत नहीं कर पाती। मैं अपनी भावनाओं को ही कभी पूरी तरह से ज़ाहिर नहीं कर पाती।
जो कहना चाहती हूँ, वो कभी कह नहीं पाती.. हमेशा ही आधे शब्द गले में अटक जाते हैं।
नाराज़गी भी पूर्ण रूप से ज़ाहिर नहीं कर पाती.. आँसू आने लगते हैं, मगर आवाज़ नहीं निकलती। फिर खुद पर ही गुस्सा निकाल लेती हूँ।
कभी उतना रो भी नहीं सकी जितनी तकलीफ़ या दुःख बर्दाश्त किया है..
मैं जाते हुए किसी भी इंसान को रोक नहीं पाती..यह भी नहीं कह पाती की रुक जाओ, क्योंकि मैं रोकना चाहती हूँ।
किसी को याद करती हूँ तो यह नहीं कह पाती की.. हाँ करती हूँ याद।
अधिकार के साथ अपनी बात मनवाना मुझे नहीं आता।
मैंने इस ना कह पाने के कारण काफ़ी कुछ खोया है..
बहुत नुकसान उठाया है।
तुम्हीं देखो ना.. मैं ऐसे ही तुमसे प्रेम में भी पूर्ण नहीं हूँ..
सब कुछ अधूरा है.. तुम पर लिखती हूँ मगर फिर भी अधूरापन लगता है.. मुझे किसी भी लेख से संतोष नहीं मिलता।
तुमसे विदा लेते समय गले लगना चाहती थी,
तुम्हारी शर्ट को तो कस कर पकड़ रखा था.. मगर देखो ना तुम्हारे हाथ को नहीं पकड़ सकी..।
आँसूओं को छुपाने की कोशिश में तुम्हारे चेहरे को देख नहीं सकी.. यह विदाई भी अधूरी ही थी.. बिल्कुल मेरी तरह।
तुमसे अब भी कहना बहुत कुछ है, मगर कह नहीं सकती..
और ना कभी कह सकूँगी।
मुझे लगता है मैं मेरे ही प्रेम में नाकाम हूँ..।
❤️❤️
~रूपकीबातें
Insta- Roop_ki_baatein
#रूपकीबातें #roopkibaatein #roopanjalisinghparmar #roop