हर तरफ़ हवाएँ चल रहीं थी,
दिपक फ़िर भी जगमगाता था,
कीसीने पुछा दिपक को की इतनी हवाएँ चल रहीं हैं तुझे बुझ जाने का दर नहीं,,,?
दिपक ने क्या खूब जवाब दिया,
यदि हवाओं को गुरुर है उसके चलने पर तो में भी मक्कम हुँ किसीकी आशा की ज्योति को ना बुझने देने में....