ये ऊटपटांग चयन शब्दों का , दिल आहत मेरा कर डाला
अब समझो हद की अब हद है , यह कौन सा नियम
बना डाला
शब्दों का चयन मौके का हो , लेखन उत्साह बढ़ जाता है
वह दिन विशेष हो जाता है , दुगुनी खुशियां दे जाता है
षड्यंत्र तो दुनिया कर ही रही , इसमें क्यों शामिल होते हो
हम सबके विश्वास का मान रखो , पाप का भागी क्यों होते हो
अपने आराध्य के चरणों की धूल हैं हम , जो दुनिया को जीना सिखलाया
शुभ आज जन्मदिन उनका है , प्रेम क्या है उन्होंने बतलाया
दिल रुक न सका मन का उद्गार , सभी से साझा कर ही दिया
आशा है दीगर अवसर पर , मौका ना मिलेगा शिकायत का
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#केरल