कहते है कि लालच का कोई अंत नहीं
लेकिन उसे भी क्या लालच ही कहेंगे जो ज़िन्दगी जीने के लिए बहुत ज़रूरी है जिसे हम अपने शब्दो में ख्वाहिश कह सकते है
बहुत बार दिल की ख्वाहिश को ऐसे अन्दर ही अंदर मारना पड़ा
ये सोचकर की शायद ये तेरी क़िस्मत में नहीं रितु...✍️